नैतिक
ईमानदार लकड़हारा
✍ लेखक राम | 📅 25 Mar 2026
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एक गरीब लकड़हारा जंगल में लकड़ी काट रहा था। अचानक उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। वह रोने लगा। तभी नदी से एक देवदूत प्रकट हुआ। उसने सोने की कुल्हाड़ी दिखाई और पूछा - क्या यह तुम्हारी है? लकड़हारे ने कहा - नहीं। फिर चाँदी की दिखाई, लकड़हारे ने फिर मना किया। जब लोहे की कुल्हाड़ी दिखाई तो लकड़हारा बोला - हाँ, यही मेरी है! देवदूत उसकी ईमानदारी से खुश हुआ और तीनों कुल्हाड़ियाँ दे दीं।
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