सोहनी महिवाल की अद्भुत प्रेम कहानी हिंदी में

हीर रांझा, रोमियो जुइलिअट की तरह सोहनी महिवाल की प्रेम कहानी बहोत प्रसिद्ध है।

sohani mahiwal story
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18वी शताब्दी में एक सुन्दर कन्या सोहनी का जन्म तुला नामक कुम्हार के घर हुआ जो गुजरात पंजाब में उस समय गुजरात की चुन्नव नदी बखरा और दिल्ली व्यपारी रस्ते के बिच में आते थे जहाँ मुसाफिरों का करवा रुकता था।

जैसे जैसे मिटटी के घड़े उनके पास आते थे उनपर सुन्दर-सुन्दर कलाकृतिया निकलते थे और उन्हें बेचने के लिए तैयार करते थे।

sohani mahiwal love story in hindi

बुखारा एक समृद्ध और आमिर व्यपारी शहजादा इज्जद बेग पंजाब आया था और गुजरात जो की वर्तमान पाकिस्तान में था वहाँ रुका था।

वहाँ पर उसने सोहनी को देखा और पूरी तरह मंत्र मुग्ध हो गया इसके बाद वह केवल सोहनी का एक झलक पाने के लिए वह सोहनी द्वारा सजाये गए मटके रोज खरीदने आया करता था।

सोहनी का दिल भी इज़्ज़त बैग पर आ गया था, अपने करवा के साथ वापस बुखारा जाने की बजाय इज़्ज़त बैग ने तुला के ही घर में नौकर बनकर काम करने की ठान ली बल्कि इज़्ज़त बैग तुला के भैसो को चराने के लिए भी जाय करता था।

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और तभी से कुछ समय बाद वहाँ महिवाल के नाम से जाना जाने लगा, सोहनी और महिवाल का प्यार कुम्हार समुदाय में खलबली का कारण बना था।

उस समय कुम्हार समाज के लोग यह नहीं चाहते थे की उनके समाज की बेटी किसी दूसरी समाज के लड़के से विवाह करे इसलिए उनके माता पिता ने तुरंत सोहनी का विवाह एक दूसरे कुम्हार के साथ तय कर दिया।

बारात के दिन जब कुम्हार घर पर आया था सोहनी पूरी तरह से अकेली पड गयी थी, और डोली में बिठाकर सोहनी को अपने पति के घर भेजा गया था।

इसके बाद इज़्ज़त बैग ने अपनी पहचान बदल ली थी और एक फ़क़ीर की तरह रहने लगा था अचानक वह सोहनी के नए घर के पास के चुंनाव नदी के पास छोटी सी झोपड़ी में रहने लगा था।

अँधेरी रात में जब सारी दुनिया सो जाती थी तब ये दोनों प्रेमी नदी के किनारे एक दूसरे से मिलने आते थे, सोहनी मिटटी के बर्तन की सहायता से तैर कर नदी के उस पार महिवाल से मिलने आया करती थी।

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महिवाल रोज़ मछलिया पकड़ता था और सोहनी को खाने के लिए बनाया करता था, एक बार ज्यादा लहरों की वजह से महिवाल मछलियों को पकड़ने में असफल रहा तब महिवाल ने अपनी जांघ से कुछ टुकड़ा काटकर उसे भुना दिया, सोहनी को इस बारे में उसे पता नहीं था।

लेकिन सोहनी ने महिवाल को बताया की आज मछली के स्वाद में फर्क लग रहा है और जब सोहनी ने अपना हाथ उसके पैर पर रखा तब सोहनी को अहसास हुआ की महिवाल ने उसके लिए अपनी जांघ पर घाव मारा है और यह बात उन दोनों के प्यार की गहराई को दर्शाती है।

इस प्रकार उनके प्रेम की कहानी के चर्चे जगह-जगह फैलते गए थे, एक दिन सोहनी के भाभी ने सोहनी का पीछा किया और उस जगह छुप गयी जहा सोहनी अपना पानी पे तैरने वाला बर्तन रखती थी।

सोहनी को ऐसा करते हुए देखते ही उसने सोहनी की सासु माँ को बता दिया और अगले ही दिन सोहनी की भाभी ने तैरने वाले बर्तन को बदलकर वहां डूबने वाला बर्तन रख दिया, उस रात जब सोहनी मीठी के बर्तन के सहारे नदी पार करने की कोशिश कर रही थी तब वह बर्तन पानी में डूबने लगा और सोहनी भी डूबने लगी, महिवाल जब नदी के उस पर सोहनी को डूबता हुआ देखा और सोहनी को बचने के लिए माहिवाल  भी पानी में कूद गया।

और इस तरह दोनों प्रेमी की मृत्यु पानी में डूबने की वजह से हो गयी